“सिक्योरिटी की परछाइयों में छिपा बड़ा खेल” – शोकाज़ पत्र, RTI में दबा सच और गतिशील इकाइयों की रहस्यमयी गतिविधियाँ बना रही हैं सनसनी!

नियमों को ठेंगा दिखाकर डिप्टी मैनेजर (माइनिंग) को एरिया सिक्योरिटी ऑफिसर का प्रभार… पत्र छिपाया गया, RTI में जवाब रोका गया और अब चार ‘मोशन सिग्नल’ से उभर रही हैं ऐसी हलचलें जो पूरे तंत्र को हिला सकती हैं।

शहडोल / धनपुरी।

यह कहानी केवल एक अधिकारी की अनुशासनहीनता की नहीं, बल्कि उस गहरी रणनीति की है जिसने सुरक्षा के नाम पर पूरे सिस्टम को अपने हिसाब से चलाने की कोशिश की। 24 न्यूज़ को प्राप्त विभागीय दस्तावेज़ों के अनुसार, 23 सितंबर 2024 को जारी एक शोकाज़ पत्र में स्वयं विभाग ने स्वीकार किया कि प्रभारी अधिकारी ड्यूटी पर निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं थे और उनके व्यवहार में अनुशासनहीनता पाई गई।

यही पत्र वह आधार बना, जिसके चलते शिकायत में उनकी कार्यप्रणाली को “संदेहास्पद” और नियुक्ति को “विभागीय कदाचारण” बताया गया। लेकिन जब इसी पत्र की प्रति सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई, तो विभाग ने उसका अस्तित्व नकारने के बजाय धारा 8(1)(j) का हवाला देकर जानकारी देने से मना कर दिया — यानी दस्तावेज़ मौजूद हैं, पर जनता तक नहीं पहुंचने दिए जा रहे।

 पत्र मौजूद, सच दबाया गया – और फिर व्यक्तिगत धमकी

दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से बचने के बाद विभाग ने चुप्पी साध ली।

लेकिन संबंधित अधिकारी ने इससे भी आगे बढ़कर, व्यक्तिगत मानहानि नोटिस भेजकर शिकायतकर्ता को डराने की कोशिश की।

अब सवाल उठ रहा है —

अगर पत्र गलत है तो विभाग उसे सार्वजनिक क्यों नहीं करता?

अगर कार्यप्रणाली पर कोई सवाल नहीं तो ‘संदेहास्पद’ शब्द से इतनी तकलीफ क्यों?

और अगर सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो अधिकारी को व्यक्तिगत स्तर पर सामने आने की ज़रूरत क्यों पड़ी?

चार ‘मोशन सिग्नल’ से खुल रहा रहस्यमयी पैटर्न

24 न्यूज़ को प्राप्त गोपनीय जानकारियाँ बताती हैं कि मामला केवल ड्यूटी में देरी तक सीमित नहीं है। सुरक्षा से जुड़ी गतिशील इकाइयों की गतिविधियों ने जांच को नई दिशा दे दी है। नाम और ठिकानों को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है, लेकिन संकेत बेहद चौंकाने वाले हैं

1. अनपेक्षित ठहराव: तय जिम्मेदारियों और तैनाती क्षेत्रों से बाहर कुछ बिंदुओं पर अप्रत्याशित रुकावट जैसी हलचल दर्ज हुई है। न कोई आदेश, न कोई कारण — फिर भी गतिविधि के निशान मौजूद हैं।

2. समय-रेखा में विसंगति: कुछ बिंदुओं पर मौजूदगी ऐसे समय में दर्ज हुई है जब ड्यूटी-चार्ट में उनकी आवश्यकता ही नहीं थी। यह असामान्यता जांच को और गहरा कर रही है।

3.गति-पथ में बदलाव: गतिशील इकाइयों की दिशा और मार्ग में कई बार अप्रत्याशित परिवर्तन हुए, जिनका कोई विभागीय औचित्य दर्ज नहीं है। यह सवाल उठाता है कि क्या कुछ हलचलें तय सीमा से बाहर जाकर की गईं।

4.रिकॉर्ड में गैप: कुछ समयखंडों का कोई स्पष्ट विवरण नहीं मिला। जैसे कुछ घटनाओं को बाद में “सामान्य” दिखाने की कोशिश की गई हो, लेकिन बीच की कड़ियाँ जानबूझकर मिटाई गई हों।

 ये चारों सिग्नल इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मामला केवल लापरवाही या ड्यूटी में चूक का नहीं, बल्कि कहीं गहरी परतों तक जाता है — एक ऐसा पैटर्न जो यह दिखाता है कि विभागीय संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे उद्देश्यों के लिए किया गया, जिनका किसी अधिकृत कार्य से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।

अब सवाल विभाग से भी बड़े हैं

क्या यह प्रभार विभागीय नियमों को नजरअंदाज कर किसी खास मकसद से दिया गया?

क्या कुछ आदेशों में बाद में बदलाव कर घटनाक्रम को “सही” दिखाने की कोशिश की गई? (सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां इसे खंगाल रही हैं)

क्या कुछ रिकॉर्ड अब उपलब्ध ही नहीं हैं क्योंकि उन्हें जानबूझकर फाइलों से हटाया गया? (इस पर भी जांच की मांग उठ रही है)

 यह सवाल अब केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं हैं। अब निशाने पर वह पूरा तंत्र है जिसने सच्चाई को छिपाने और जवाबदेही से बचने के लिए हर तरीका अपनाया।

 ‘ऑपरेशन मिलीभगत’ – अब खेल खुलने ही वाला है

24 न्यूज़ की अगली रिपोर्ट में इन चार ‘मोशन सिग्नल’ की टाइमलाइन, शोकाज़ पत्र और ड्यूटी रिकॉर्ड का क्रॉस-विश्लेषण प्रस्तुत किया जाएगा। शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह कहानी विभागीय गलती की नहीं बल्कि एक सुनियोजित “साज़िश” की है — जिसमें पद, अधिकार और संसाधन तीनों को “निजी सुविधा” में बदल दिया गया।

 सच्चाई अब केवल दस्तक नहीं दे रही — वह दरवाज़ा तोड़कर अंदर आने को तैयार है। और जब यह रिपोर्ट सामने आएगी, तो सवाल “किसने क्या किया” से आगे बढ़कर “क्यों किया और किसके लिए किया” तक जाएंगे।

 कानूनी अस्वीकरण –

यह रिपोर्ट विभागीय दस्तावेज़ों, RTI जवाबों, सार्वजनिक रिकॉर्ड और विश्वसनीय सूत्रों पर आधारित जनहित प्रकाशन है। इसमें उठाए गए प्रश्न और विश्लेषण आधिकारिक कार्यप्रणाली एवं सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग से जुड़े हैं। किसी की निजी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाना उद्देश्य नहीं। संबंधित पक्ष यदि चाहे, तो अपना लिखित पक्ष 24 न्यूज़ को भेज सकता है, जिसे समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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