“राजस्व की साजिश और लहू से सनी ज़मीन” — केशवाही हत्याकांड के बाद मिथलेश राय की पोस्ट ने हिलाया प्रशासन!

केशवाही डबल मर्डर के बाद सोशल मीडिया पर शहडोल निवासी मिथलेश राय की एक पोस्ट ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
राय की पोस्ट में न केवल हालिया दोहरे हत्याकांड पर दुख और आक्रोश व्यक्त किया गया है,
बल्कि उन्होंने अपने पुराने जमीन विवाद और राजस्व विभाग की कथित गड़बड़ियों का ज़िक्र करते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।


“कभी यह इलाका सौहार्द का प्रतीक था, अब खून से लाल…”

मिथलेश राय ने लिखा —

“कभी यह क्षेत्र शांति और सौहार्द के लिए जाना जाता था,
लेकिन पिछले बीस वर्षों में यहां ज़मीन विवादों ने नफरत और हिंसा बो दी है।
पटवारी, आरआई और राजस्व अधिकारी सरकारी दस्तावेज़ों में फेरबदल करते हैं,
और आम आदमी अनजाने में खूनी संघर्ष में उतर जाता है।”


2008 का मामला — सरकारी दस्तावेज़ों में बदलाव के आरोप

राय ने अपनी पोस्ट में बताया कि 2008 में उनके परिवार के साथ भी ऐसा ही एक प्रकरण हुआ था।
उनके अनुसार, विजनबाला तालुकदार बनाम आर.पी. जैन नामक विवाद में
राजस्व दस्तावेज़ों में व्यापक फेरबदल किया गया।

राय का दावा है कि –

“जिस दस्तावेज़ के आधार पर हमने कोर्ट में मुकदमा जीता था,
वही रिकॉर्ड कुछ वर्षों बाद बदले हुए रूप में तहसील में मिला।
सरकारी सड़क को निजी चौहद्दी में दिखा दिया गया।”


तत्कालीन तहसीलदार पर आरोप — “दिव्या सिंह ने एकतरफा सीमांकन कराया”

मिथलेश राय ने अपने पोस्ट में तत्कालीन तहसीलदार दिव्या सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
उनका कहना है कि –

“जब हमने पुराना रिकॉर्ड दिखाया तो तत्कालीन तहसीलदार दिव्या सिंह ने आंख मूंदकर
एकतरफा सीमांकन का आदेश दे दिया। यह पूरा मामला राजस्व साजिश का हिस्सा लगता है।”


‘अगर हमारे साथ कुछ हुआ…’ — पोस्ट का सबसे गंभीर अंश

राय ने लिखा –

“अगर भविष्य में मेरे या मेरे परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है,
तो उसकी जिम्मेदारी तत्कालीन तहसीलदार दिव्या सिंह, संबंधित पटवारी और आरआई की होगी।”

यह बयान अब केवल एक नागरिक की प्रतिक्रिया नहीं,
बल्कि राजस्व विभाग की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर सीधा प्रश्नचिन्ह बन चुका है।


केशवाही हत्याकांड से जुड़ा बड़ा सवाल — क्या हर विवाद की जड़ में यही तंत्र है?

राजस्व रिकॉर्ड में की गई कथित हेराफेरी,
गलत सीमांकन और विवादित भूमि पर शिथिल निगरानी —
यही कारण हैं कि शहडोल जैसे शांत क्षेत्र अब बार-बार हिंसा की चपेट में आ रहे हैं।
केशवाही कांड ने इस भयावह सच्चाई को एक बार फिर उजागर किया है।


महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण (Legal Disclaimer):

यह रिपोर्ट मिथलेश राय की सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है,
जिसमें उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और राजस्व अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
इस प्रकरण से संबंधित आपराधिक मामला एवं भूमि विवाद
वर्तमान में माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

24 न्यूज़ न्यायिक प्रक्रिया का पूर्ण सम्मान करता है
और किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराने का दावा नहीं करता।
प्रस्तुत जानकारी केवल जनहित में, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विवरणों पर आधारित है।


24 न्यूज़ का मत:

मिथलेश राय की यह पोस्ट एक गंभीर जन चेतावनी है।
यह दिखाती है कि राजस्व रिकॉर्ड की लापरवाही और फाइलों की राजनीति
आम लोगों को किस तरह हिंसा की ओर धकेल रही है।
प्रशासन के लिए अब यह वक्त है कि वह इस चेतावनी को गंभीरता से ले —
क्योंकि जब न्याय में देरी होती है, तो अपराध को रास्ता मिल जाता है।

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