बुढ़ार में मौत से उबाल! स्कूटी सवार राहुल शाहू की दर्दनाक मौत के बाद सड़क पर बवाल, शव रखकर घंटों चला उग्र प्रदर्शन

शहडोल/बुढ़ार।

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के बुढ़ार थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। स्कूटी सवार युवक राहुल शाहू की दर्दनाक मौत के बाद गुस्से में आए लोगों ने शव को सड़क पर रखकर घंटों तक उग्र प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की। हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को भारी बल के साथ मौके पर तैनात होना पड़ा।

कुछ ही पलों में खत्म हो गई राहुल की ज़िंदगी           

जानकारी के मुताबिक बुढ़ार निवासी राहुल शाहू स्कूटी से कहीं जा रहा था, तभी अचानक सड़क पर हुए हादसे में वह बुरी तरह घायल हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक वाहन चालक ने अचानक गाड़ी का दरवाज़ा खोल दिया, जिससे राहुल की स्कूटी टकरा गई और वह सड़क पर गिर गया। इसी दौरान पीछे से आ रही तेज़ रफ्तार नेक्सन कार ने उसे बेरहमी से कुचल दिया।

घटना इतनी भयावह थी कि राहुल शाहू ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घर का इकलौता चिराग कुछ ही पलों में बुझ गया।

 शव रखकर सड़क पर बवाल, पुलिस के छूटे पसीने

मृतक के परिजनों और सैकड़ों स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुस्साए लोगों ने प्रशासन और पुलिस पर घोर लापरवाही के आरोप लगाए और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

प्रदर्शन के कारण बुढ़ार मुख्य मार्ग पर घंटों तक यातायात पूरी तरह ठप रहा। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने साफ कह दिया – “जब तक न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा!”

 भीड़ की सख्त मांगें

दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर हत्या के प्रावधानों में केस दर्ज किया जाए।

मृतक परिवार को मुआवज़ा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।

क्षेत्र की जर्जर सड़कों की मरम्मत और ट्रैफिक व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए होते तो आज राहुल शाहू ज़िंदा होता।

 सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

बुढ़ार और आसपास के क्षेत्रों में सड़क हादसे आम हो चुके हैं। तेज़ रफ्तार, बिना नियमों के वाहन संचालन, सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों की लापरवाही और प्रशासन की ढिलाई ने सड़क सुरक्षा को मज़ाक बना दिया है। हर बार “जांच और कार्रवाई” का रटा-रटाया बयान देकर मामले को दबा दिया जाता है, लेकिन असली सुधार कहीं दिखाई नहीं देता। राहुल शाहू की मौत कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि यह व्यवस्था की नाकामी और लापरवाही का नतीजा है। सवाल यह है कि आखिर कितनी जानें जाएंगी तब सिस्टम जागेगा ?

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