“शहडोल बिजली घोटाला — JE की चोरी, DE की सेटिंग, SE की लीपापोती, CE की निरंकुशता और MD की चुप्पी अब दिल्ली तक पहुँची!”

शहडोल।

बिजली विभाग में भ्रष्टाचार का करंट इतना तेज़ है कि अब जनता की सहनशक्ति जवाब दे रही है।

बुढ़ार की गायब लाइन, पड़रिया की जेबकाट वसूली और रामपुर बटुरा माइंस का अवैध कनेक्शन — तीनों प्रकरणों पर शिकायतें दर्ज हैं, दस्तावेज़ मौजूद हैं, लेकिन राज्य स्तर के अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं।

अब मामला सीधे केंद्र सरकार के ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल तक पहुँच चुका है।

बुढ़ार — लाइन गायब, अफसर भी गायब

करोड़ों की लागत से खड़ी 11 के.वी. लाइन रहस्यमयी तरीके से गायब।

JE ने चुप्पी साध ली, DE ने फाइल मैनेज कर दी।

SE ने रिपोर्ट में लिख दिया — “लाइन समाप्त।”

CE ने निरंकुश होकर पूरे मामले को दबा दिया।

MD ने भी जिम्मेदारी तय करने की जहमत नहीं उठाई।

 जनता का सवाल — “लाइन कहाँ गई और किसके संरक्षण में गायब हुई?”

पड़रिया — किसानों की जेब कटी, फाइलें चमकी

किसान उमेश पटेल से 5.73 लाख की सीधी वसूली।

रकम सरकारी खाते में नहीं, कर्मचारियों की जेब में।

JE की ID से फर्जी Estimate, DE की सेटिंग और SE की लीपापोती।

CE ने संरक्षण दिया और MD ने चुप्पी साध ली।

 सबूत मौजूद — शपथ पत्र, पंचनामा, विभागीय पत्र।

फिर भी कार्रवाई शून्य।

रामपुर बटुरा — नियम ताक पर, अफसरों की मौज

माइंस परिसर में दो-दो ट्रांसफार्मर खड़े।

पूरी खदान की सप्लाई लो टेंशन (LT) पर, जबकि नियम कहता है कि माइंस को हाई टेंशन (HT) कनेक्शन चाहिए।

JE से लेकर SE तक सबने चुप्पी साधी, CE ने फाइल दबा दी।

MD ने भी कोई कदम नहीं उठाया।

अब सवाल दिल्ली तक पहुँच गया है —

“HT से LT का यह खेल आखिर किसके इशारे पर हुआ?”

JE से CE तक करप्शन की सीढ़ी

JE — मौके पर हेराफेरी।

DE — कागजों में खेल।

SE — रिपोर्ट से लीपापोती।

CE — निरंकुश होकर सबको बचाता है।

MD — सब कुछ जानते हुए चुप रहता है।

 और मंत्री? — मामला वहाँ तक पहुँचा ही नहीं।

 व्यंग्य की धार –

“JE कहता है — लाइन उड़ गई, पता नहीं कहाँ गई!

DE कहता है — पैसा आया, जेब में गया, इसमें दिक्कत क्या है?

SE कहता है — रिपोर्ट बना दी, सब ठीक है।

CE कहता है — मैं निरंकुश हूँ, मुझे कौन रोक सकता है?

MD कहता है — सब दुरुस्त है, फाइल बंद करो।

 जनता कह रही है —

‘बिजली नहीं, अब करप्शन का करंट मिल रहा है!’”

 जनता का सवाल –

“क्या CE इतना बेलगाम है कि सब अधिकारी इसके आगे बौने साबित हो रहे हैं?”

“क्या JE से MD तक सबकी जेबें भर रही हैं और जनता को अंधेरे में रखा जा रहा है?”

“क्या अब केंद्र सरकार को सीधे लगाम कसनी पड़ेगी?”

अस्वीकरण –

यह रिपोर्ट विभागीय पत्रों, Estimate, पंचनामों, शपथ पत्रों और अन्य दस्तावेज़ी साक्ष्यों पर आधारित है। इसमें उल्लिखित तथ्य केवल जनहित में प्रस्तुत किए गए हैं। यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी को इस पर आपत्ति है तो वे अपना पक्ष ‘24 News Channel’ को भेज सकते हैं। चैनल उनके जवाब को भी समान रूप से प्रकाशित करेगा।

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