जहाँ देशभर में सरकारी कामों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने की बातें हो रही हैं,
वहीं SECL सोहागपुर क्षेत्र में एक अलग ही वर्किंग मॉडल तेजी से लोकप्रिय होता दिख रहा है।
यह मॉडल कहलाता है –
“ठेकेदार–ओवरसियर फ्रेंडली डेवलपमेंट मॉडल”
इस मॉडल में –
काम करने वाला भी मुस्कुराता है,
माप-पुस्तिका बनाने वाला भी मुस्कुराता है,
और जनता बस देखती रह जाती है…
सिस्टम का नया सिद्धांत –
“जहाँ दोस्ती पक्की, वहाँ माप-पुस्तिका सटीक।”
– स्थानीय सूत्रों के अनुसार
यह फोटो क्या बताती है?
फोटो यह नहीं बताती कि काम कैसे हुआ,
फोटो यह बताती है कि
काम करने वाले और काम जांचने वाले का तालमेल कितना मजबूत है।
विकास की मजबूती तो भविष्य बताएगा,
लेकिन जोड़ियाँ तो आज ही बन जाती हैं।
जनता का हल्का-फुल्का सवाल
“अगर ओवरसियर और ठेकेदार इस तरह भाईचारा निभाएँगे,
तो फिर माप-पुस्तिका कौन निष्पक्ष रखेगा?”
“और अगर माप-पुस्तिका ही दोस्ती में लिखी जाने लगे,
तो काम जनता के लिए होगा या यादों के लिए?”
प्रशासन से छोटी-सी विनती –
काम जैसा भी हो, पर पैसा तो जनता का है —
इसलिए ज़रा एक बार देख लेना कि मुस्कुराहट के पीछे मजबूती भी है, या नहीं।



