रामपुर-बटुरा माइंस : कोयला निकला, ज़हर बहा — पाँच गायों की दर्दनाक मौत, ग्रामीणों में गुस्सा

रामपुर-बटुरा / शहडोल।
सोहागपुर क्षेत्र स्थित रामपुर-बटुरा कोयला खदान के पास चरनोप्पर में चर रही पाँच गौवंशियों की तड़प-तड़प कर मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि खदान से निकलने वाला दूषित अपशिष्ट पानी और कोयला धूल, नाले के माध्यम से सीधे चर-भूमि और खेतों में पहुँच रहा है, जिसके कारण घास, मिट्टी और पानी जहरीला हो गया है।

मृत गायों के मुंह से झाग, तेज श्वास अवरोध, और शरीर में ऐंठन की स्थिति साफ संकेत देती है कि यह सामान्य बीमारी नहीं, बल्कि रासायनिक प्रदूषण का प्रभाव है।


ग्रामीणों का आरोप –

“खदान का गंदा पानी और राख कई महीनों से इसी तरफ छोड़ी जा रही है।
पहले फसलें जलीं, अब गायें मर रही हैं।
प्रबंधन को कई बार बताया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।”

गाँव के लोग इस घटना के बाद आक्रोश में हैं और 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
अगर कार्रवाई नहीं होती, तो ग्रामीणों ने खदान गेट पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।


24 NEWS की ग्राउंड रिपोर्ट

चरनोप्पर की घास पर धूल और काली राख की परत
नाले का पानी गाढ़ा, काला और बदबूदार
मृत गायों के मुंह पर झाग और बेचैनी के संकेत
परीक्षण के लिए अभी तक कोई स्वतंत्र नमूना संग्रह नहीं

यह स्पष्ट रूप से पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का मामला है।


प्रशासन और एसईसीएल पर सवाल

सवाल जवाब कौन देगा?

अपशिष्ट जल का उपचार प्लांट चालू है? खदान प्रबंधन
चर-भूमि में दूषण की जांच कब होगी? पर्यावरण अधिकारी
मरने वाली गायों के मालिकों को मुआवज़ा? एसईसीएल प्रशासन
घटनास्थल का निरीक्षण क्यों नहीं हुआ? स्थानीय प्रशासन

अब तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट या बयान जारी नहीं किया गया है।


कानूनी पक्ष (स्पष्ट) –

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986

जल प्रदूषण निवारण अधिनियम, 1974

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960

IPC 269 / 270 (जन स्वास्थ्य को खतरे में डालना)

इन धाराओं के तहत जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रकरण दर्ज हो सकता है।


ग्रामीणों की मुख्य माँगें –

मृत पशुपालकों को तत्काल मुआवजा
स्वतंत्र लैब से पानी-हवा-मिट्टी की जांच
चरनोपर में दूषित प्रवाह को तुरंत रोका जाए
खदान प्रबंधन की जवाबदेही तय हो


24 NEWS की टिप्पणी –

विकास का अर्थ यह नहीं कि गाँव की साँसें छीनी जाएँ।
कोयला महत्वपूर्ण है, लेकिन जीवन उससे बड़ा है।
प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना होगा।

  • Related Posts

    गणतंत्र दिवस 2026: क्यों 26 जनवरी भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन है?

    24 न्यूज़ चैनल विशेष रिपोर्ट हर साल 26 जनवरी को पूरा भारत गणतंत्र दिवस (Republic Day of India) मनाता है। लेकिन बहुत से लोग आज भी यह सवाल पूछते हैं…

    धर्म बनाम फर्जीवाड़ा—SECL सोहागपुर का FOUR-WHEELER टेंडर प्रकरण सिर्फ गड़बड़ी नहीं, ‘नैतिक पतन’ का जीवंत प्रमाण

    (मामला : चार पहिया वाहन किराये पर लेने का टेंडर | स्रोत : हरिभूमि समाचार रिपोर्ट) परिचय : जब नियमों पर धूल जम जाए और सत्य दम तोड़ दे, तो…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *