धनपुरी में सेवा नहीं — सन्नाटा है! रिश्वत कांड के बाद नगर पालिका ‘गायब’

धनपुरी।
धनपुरी नगर पालिका में हाल ही में लोकायुक्त द्वारा घूस लेते कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ने की घटना के बाद से कार्यालय में अजीब-सा सन्नाटा छाया हुआ है।
सामान्यत: हलचल से भरा रहने वाला नगरपालिका भवन इस समय खाली कुर्सियों और बंद कमरों का प्रतीक बन गया है।

नगर पालिका पहुँचने वाले नागरिकों को हर ओर से वही रटा-रटाया जवाब मिलता है—
“साहब फील्ड में हैं।”
लेकिन यह फील्ड कहाँ है,
कितने समय के लिए है
और कब तक जनता इंतज़ार करेगी,
इसका जवाब देने वाला कोई मौजूद नहीं।

धनपुरी के 28 वार्डों के नागरिक अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए नगरपालिका के चक्कर काट रहे हैं,
लेकिन कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें बार-बार निराश लौटना पड़ रहा है।
सबसे अधिक कष्ट उन गरीब और मजदूर परिवारों को हो रहा है, जिनकी जेब में किराए तक के पैसे नहीं होते।

छापे के अगले ही दिन एक विकलांग व्यक्ति को नगरपालिका की दहलीज़ तक घिसटते हुए आते देखा गया—
वह मदद की उम्मीद लेकर आया था,
लेकिन उसके सामने सिर्फ खाली कुर्सियाँ और बंद दरवाज़े थे।
यह दृश्य केवल व्यवस्था की कमजोरी ही नहीं,
मानवीय संवेदनाओं की थकान को भी उजागर करता है।


CMO अनुपस्थित — निगरानी का पहिया थम गया

सूत्र बताते हैं कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) पिछले लगभग 15 दिनों से प्रशिक्षण पर बाहर हैं।
उनकी अनुपस्थिति में कार्यालय की निगरानी ढीली हो गई है और कर्मचारियों को अनुपस्थित रहने की खुली सुविधा दिख रही है।


धनपुरी नगरपालिका में भ्रष्टाचार कोई घटना नहीं — व्यवस्था है

जनचर्चा कहती है —
यहाँ काम फाइलों से नहीं, “सिस्टम से बाहर लेन-देन” से चलता है।
लोकायुक्त कार्रवाई ने इस लेन-देन की प्रक्रिया को एकदम रोक दिया है,
और अब कई चेहरे सावधानी और भय की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।

चर्चा यह भी है कि —

कई वार्डों में अवैध वसूली का खेल पुराना है

इसके वीडियो, ऑडियो और सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं

पीड़ित लोग सही समय पर बयान देने को तैयार हैं

इसीलिए नगर पालिका में इस समय शांति नहीं, डर का सन्नाटा देखा जा रहा है।


सबसे बड़ा सवाल जनता पूछ रही है

पद स्थिति नागरिकों पर प्रभाव

नगरपालिका अध्यक्ष मौन विश्वास में कमी
मुख्य नगरपालिका अधिकारी अनुपस्थित निगरानी ठप
कर्मचारी वर्ग गायब जनता परेशान
आमजन उपस्थित समाधान नहीं


धनपुरी पूछ रहा है

“नगर पालिका जनता की है या कुछ चुनिंदा लोगों की सुविधाओं का केंद्र?”
“एक पकड़ा गया — पर रिश्वत का जाल कहाँ तक है?”

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