“पड़रिया कांड: ₹5.73 लाख की वसूली, ट्रांसफार्मर चोरी और अवैध 11 केवी लाइन — अफसर–आउटसोर्स गठजोड़ उजागर”

लाइनमैन अवधेश कंवर और जे.ई. एस.बी. विश्वकर्मा की कार्रवाई से घोटाला सामने आया; डी.ई. डी.के. तिवारी, जे.ई. विकास सिंह, आउटसोर्स जीतेन्द्र विश्वकर्मा और अखिलेश मिश्रा पर गंभीर आरोप।

रिपोर्ट (24News Channel संवाददाता) –

शहडोल जिले के बुढ़ार क्षेत्र का पड़रिया कांड बिजली विभाग के इतिहास का बड़ा घोटाला साबित हो रहा है।

दस्तावेज़, शपथपत्र और आवेदन बताते हैं कि विभागीय अफसरों और आउटसोर्स कर्मचारियों ने मिलकर ₹5.73 लाख की वसूली, कृषि अनुदान वाला ट्रांसफार्मर चोरी, और अवैध 11 केवी लाइन खड़ी की।

पैसा कहाँ गया?

₹2 लाख – तरुण पटेल के खाते से।

₹1.43 लाख – एसबीआई कोटा (राजस्थान) से।

₹4 लाख – एक्सिस बैंक बुढ़ार, खाता अखिलेश मिश्रा (आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर, बिजली ऑफिस बुढ़ार)।

₹1.30 लाख – नकद, सीधे आउटसोर्स जीतेन्द्र विश्वकर्मा को।

कुल रकम: ₹5,73,000, जिसकी कोई विभागीय रसीद जारी नहीं हुई।

कैसे रचा गया खेल?

22 मई 2022 — तत्कालीन जे.ई. विकास सिंह और आउटसोर्स जीतेन्द्र विश्वकर्मा ने निरीक्षण किया और किसान उमेश पटेल से कहा कि खंभे-ट्रांसफार्मर लगेंगे।

उसी दिन स्टीमेट/प्रोजेक्ट रिपोर्ट क्रमांक 697781 बनाई गई और रकम जमा करने के लिए अखिलेश मिश्रा का निजी खाता दे दिया गया।

रकम से 15 पोल, 1 डीपी ट्रांसफार्मर, 1 एलटी पोल लगाकर अवैध लाइन खड़ी की गई।

इस दौरान किसान जवाहर गुप्ता का अनुदान वाला 25 KVA ट्रांसफार्मर चोरी कर उमेश पटेल को लगा दिया गया।

गड़बड़ी कैसे पकड़ी गई?

03/09/22 — विभागीय लाइनमैन अवधेश कंवर ने मौके पर अवैध 11 केवी लाइन पकड़ी और पंचनामा बनाया।

09/11/22 — नए जे.ई. एस.बी. विश्वकर्मा ने निरीक्षण कर डिजिटल पंचनामा (SDL20221109163311357) तैयार किया और ₹29,513 का जुर्माना लगाया।

18/11/22 — किसान ने शपथपत्र देकर रकम और खातों का विवरण दर्ज किया।

21/11/22 — जे.ई. की जांच में लाइन अवैध साबित होने के बाद, किसान उमेश पटेल ने AE और JE को आवेदन दिया कि उसका कनेक्शन वैध किया जाए (कॉपी EE और DE को भी, आवक क्रमांक 71/21/11/22 और 240/21/11/22)।

01/12/22 — EE शहडोल ने पत्र क्रमांक 2356 (गोपनीय) जे.ई. एस.बी. विश्वकर्मा को व्यक्तिगत नाम से भेजा।

इसके बाद — तत्कालीन डी.ई. डी.के. तिवारी ने इस पत्र और किसान के आवेदन की आड़ लेकर नया स्टीमेट बनवाया, ताकि अवैध काम को कागजों में वैध दिखाया जा सके।

किन धाराओं में मामला बनता है?

विद्युत अधिनियम 2003 – धारा 135, 150, 126

आईपीसी – धारा 409, 420, 468, 471, 120-B

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम

जनता के सवाल –

किसानों से वसूली करने वाले अब तक क्यों खुले घूम रहे हैं?

क्या विभाग अफसरों को बचाकर सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर ठीकरा फोड़ना चाहता है?

क्या EOW और विजिलेंस इस घोटाले पर कार्रवाई करेंगे या यह भी लीपा-पोती का शिकार होगा?

हाइलाइट बॉक्स –

₹5.73 लाख की अवैध वसूली, बिना रसीद।

जवाहर गुप्ता का अनुदान ट्रांसफार्मर चोरी, उमेश पटेल को लगाया।

रकम पहुँची अखिलेश मिश्रा (आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर) के खाते में।

नकद वसूली जीतेन्द्र विश्वकर्मा ने की।

लाइनमैन अवधेश कंवर और जे.ई. एस.बी. विश्वकर्मा ने सच उजागर किया।

डी.ई. डी.के. तिवारी ने दबाव डालकर नया स्टीमेट बनवाया।

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