SECL के खिलाफ बकही में जनाक्रोश विस्फोट, आंदोलन बना प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती

7वें दिन भी आमरण अनशन जारी, ग्रामीणों का ऐलान — “अब आर-पार की लड़ाई होगी”

CMD बिलासपुर आंदोलन स्थल तक नहीं पहुंचे, गूंजे “मुर्दाबाद” के नारे

ग्रामीण बोले — “हमारी जमीन से अरबों का कोयला निकला, बदले में मिला सिर्फ धोखा”

शहडोल/सोहागपुर।

सोहागपुर क्षेत्र की शारदा ओसीएम परियोजना को लेकर बकहो-बकही गांव में भड़का जनाक्रोश अब SECL प्रबंधन के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। 25 मई 2026 से रोजगार, मुआवजा और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुआ आमरण अनशन आज सातवें दिन भी जारी है, लेकिन अब तक SECL प्रबंधन और प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।

आंदोलनकारी ग्रामीणों का आरोप है कि जिन किसानों की पुश्तैनी जमीन लेकर करोड़ों-अरबों रुपये का कोयला निकाला जा रहा है, उन्हीं परिवारों के युवा आज बेरोजगारी, गरीबी और उपेक्षा का जीवन जीने को मजबूर हैं।

आंदोलन स्थल पर दिन-ब-दिन ग्रामीणों की भीड़ बढ़ती जा रही है और पूरे क्षेत्र में माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन खदान बंदी और व्यापक जनआंदोलन में बदल सकता है।

CMD के रवैये से भड़के ग्रामीण

30 मई को SECL CMD बिलासपुर का सोहागपुर क्षेत्र दौरा हुआ था। प्रभावित ग्रामीणों और आंदोलनकारियों को उम्मीद थी कि कंपनी के सर्वोच्च अधिकारी आंदोलन स्थल पहुंचकर वर्षों से लंबित समस्याओं पर चर्चा करेंगे, लेकिन CMD आंदोलन स्थल तक नहीं पहुंचे।

इस घटना के बाद आंदोलन स्थल पर भारी नाराजगी देखने को मिली और ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी की—

“CMD बिलासपुर मुर्दाबाद…”

“SECL प्रबंधन होश में आओ…”

“जमीन हमारी, रोजगार किसका…”

ग्रामीणों का कहना है कि जब कंपनी का शीर्ष प्रबंधन ही प्रभावित परिवारों की बात सुनने को तैयार नहीं है, तो यह SECL की संवेदनहीन कार्यप्रणाली को उजागर करता है।

गंभीर आरोपों से घिरा SECL प्रबंधन

बहुजन गोंडवाना पार्टी एवं ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में SECL प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि—

– भूमि अधिग्रहण में नियमों की अनदेखी की गई

– ग्राम सभा और आपत्तियों की सुनवाई नहीं कराई गई

– प्रभावित परिवारों को रोजगार नहीं दिया गया

– पुराने दरों पर मुआवजा देकर किसानों के साथ अन्याय किया गया

– स्थानीय युवाओं की जगह बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी गई

– गांवों में सड़क, पानी, फिल्ट्रेशन प्लांट, स्ट्रीट लाइट और खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाओं के वादे अधूरे छोड़ दिए गए

– आंदोलन खत्म कराने के लिए बार-बार झूठे आश्वासन दिए गए

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों से प्रभावित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन SECL प्रबंधन लगातार उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रहा है।

“अब पीछे हटने वाले नहीं”

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह सिर्फ नौकरी या मुआवजे की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है—

«“पहले हमारी जमीन गई, फिर रोजगार के सपने टूटे, अब हमारी आवाज भी दबाई जा रही है। लेकिन इस बार आंदोलन रुकेगा नहीं।”»

आंदोलन स्थल पर महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की लगातार बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत दे रही है कि बकही का यह आंदोलन अब पूरे क्षेत्र की बड़ी जनलड़ाई का रूप ले सकता है।

खदान बंदी की चेतावनी से बढ़ी हलचल

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि SECL प्रबंधन ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आने वाले दिनों में खदान बंद आंदोलन शुरू किया जाएगा। इससे उत्पादन प्रभावित होने की संभावना से प्रबंधन और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ गई है।

सूत्रों के अनुसार आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय स्तर पर लगातार बैठकों का दौर चल रहा है, लेकिन फिलहाल समाधान की कोई स्पष्ट स्थिति दिखाई नहीं दे रही।

सबसे बड़ा सवाल

अब पूरे क्षेत्र में एक ही सवाल गूंज रहा है—

«आखिर जिनकी जमीन पर खदान चल रही है,

क्या उन्हें उनका हक मिलेगा?»

या फिर बकही की यह चिंगारी आने वाले दिनों में SECL प्रबंधन के खिलाफ सबसे बड़े जनआंदोलन में बदल जाएगी?

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