खनन अधिकारी ने SISF परेड में खड़े होकर तोड़ा प्रोटोकॉल, शिकायत पत्र पहुँचा CMD और गृह मंत्रालय तक

सोहागपुर/शहडोल।दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) सोहागपुर क्षेत्र के डिप्टी मैनेजर (माइनिंग) अमित सिंह पर गंभीर आरोप लगे हैं। गणतंत्र दिवस पर आयोजित State Industrial Security Force (SISF) की परेड (सटीक वर्ष अज्ञात) में वे जवानों की पंक्ति के बीच खड़े दिखाई दिए। तस्वीरों में अमित सिंह सिविल ड्रेस और पहचान पत्र लगाए हुए दिखाई देते हैं, जबकि आसपास वर्दीधारी सुरक्षा बल के जवान मौजूद हैं।

सोशल मीडिया पर साझा की गई इन तस्वीरों के आधार पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने खुद को परेड का “अधिकृत हिस्सा” दिखाने की कोशिश की।

नियम और प्रोटोकॉल का उल्लंघन

Coal India Limited/SECL के Conduct, Discipline and Appeal (CDA) Rules, 1978 के तहत ऐसा कोई भी कार्य “दुर्व्यवहार (misconduct)” की श्रेणी में आता है, जिससे कंपनी अथवा किसी सरकारी संस्था की छवि धूमिल हो।

सुरक्षा बलों की परेड और सलामी का अधिकार केवल बल के वरिष्ठ अधिकारियों अथवा औपचारिक मुख्य अतिथियों (राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, कलेक्टर आदि) को होता है।

एक Deputy Manager (Mining) का पद इस श्रेणी में नहीं आता।

गंभीर सवाल

किसकी अनुमति से एक माइनिंग अफसर को सुरक्षा बल की पंक्ति में खड़ा किया गया?

क्या यह कार्य अनुशासन और गरिमा की खुली अवहेलना नहीं है?

क्या यह प्रोटोकॉल का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत छवि गढ़ने का प्रयास नहीं है?

शिकायत पत्र पहुँचा उच्च स्तर तक।

इस पूरे मामले को लेकर 24 न्यूज़ चैनल के संपादक-इन-चीफ धर्मेन्द्र द्विवेदी ने SECL के CMD को औपचारिक शिकायत पत्र भेजा है। पत्र की प्रतिलिपि (CC) मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक, गृह मंत्रालय भारत सरकार, चेयरमैन कोल इंडिया लिमिटेड, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को भी प्रेषित की गई है।

शिकायत पत्र में मांग की गई है कि –

1. इस मामले की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए।

2. अमित सिंह के खिलाफ CDA Rules, 1978 के अंतर्गत कठोर विभागीय कार्यवाही (Major Penalty Proceedings) शुरू की जाए।

3. भविष्य में इस तरह का दुरुपयोग रोकने के लिए सभी इकाइयों में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।

चेतावनी पत्र में यह भी स्पष्ट उल्लेख है कि यदि इस मामले पर त्वरित संज्ञान नहीं लिया गया तो इसे केंद्रीय सतर्कता आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग, लोकपाल तथा माननीय न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

निष्कर्ष

यह प्रकरण केवल एक फोटो भर नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि किस प्रकार एक माइनिंग अफसर ने सुरक्षा बल की परंपरा और अनुशासन को दरकिनार कर अपने पद का दुरुपयोग किया। अब देखना यह होगा कि SECL प्रबंधन और अन्य संबंधित संस्थान इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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