नई कलेक्टर, नई उम्मीदें: क्या शहडोल अब सुशासन की नई इबारत लिखेगा?

संपादकीय | 24 न्यूज़ चैनल

शहडोल को नई कलेक्टर के रूप में आईएएस अधिकारी सुश्री मिशा सिंह मिली हैं। प्रशासनिक तबादले अक्सर होते रहते हैं, लेकिन कुछ नियुक्तियाँ ऐसी होती हैं जिन पर पूरे जिले की निगाहें टिक जाती हैं। शहडोल भी आज ऐसे ही एक मोड़ पर खड़ा है।

यह जिला केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं है। यह देश की ऊर्जा अर्थव्यवस्था से जुड़ा कोयला क्षेत्र है, आदिवासी संस्कृति की पहचान है और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध भूभाग है। इसके बावजूद यहाँ वर्षों से राजस्व विवाद, विकास कार्यों में देरी, खनन से जुड़े मुद्दे, भ्रष्टाचार की शिकायतें, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी चुनौतियाँ समय-समय पर सामने आती रही हैं।

ऐसे में नई कलेक्टर के सामने सबसे बड़ी परीक्षा किसी नई योजना की घोषणा नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को मजबूत करना होगी। आम नागरिक यह देखना चाहता है कि क्या उसकी शिकायत समय पर सुनी जाएगी? क्या सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ेगी? क्या कानून का पालन सभी के लिए समान होगा? क्या गरीब, किसान, आदिवासी, मजदूर और आम नागरिक को बिना भटकाए न्याय मिल सकेगा?

शहडोल की जनता को किसी चमत्कार की अपेक्षा नहीं है। उसकी अपेक्षा केवल इतनी है कि प्रशासन संवेदनशील हो, निर्णय समयबद्ध हों और सरकारी व्यवस्था आम नागरिक के लिए सुलभ बने। यही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है।

एक मजबूत जिला वही होता है जहाँ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, कर्मचारी, मीडिया और आम नागरिक अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें। लोकतंत्र में प्रशासन और मीडिया विरोधी नहीं, बल्कि जनहित के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। जहाँ संवाद और जवाबदेही बनी रहती है, वहाँ विकास की गति स्वतः तेज हो जाती है।

24 न्यूज़ चैनल नई कलेक्टर सुश्री मिशा सिंह का शहडोल आगमन पर स्वागत करता है। साथ ही यह भी विश्वास व्यक्त करता है कि उनके कार्यकाल में पारदर्शिता, निष्पक्षता, संवेदनशीलता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलेगी। यही शहडोल की जनता की सबसे बड़ी अपेक्षा है।

अब निगाहें नियुक्ति पर नहीं, बल्कि निर्णयों पर होंगी। क्योंकि इतिहास पद से नहीं, कार्यों से लिखा जाता है।

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