कारोबारमध्यप्रदेश

सेंधवा मंडी में बीते पांच वर्षों में 30 फीसदी घटी कपास आवक

Sendhwa Cotton Market। एक समय था जब सेंधवा कपास मंडी में सफेद सोने की चमक बरकरार थी। कपास की आवक को लेकर शहर की मंडी एशिया में दूसरे नंबर पर आती थी, लेकिन वर्ष 2002-03 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा फेडरेशन व्यवस्था खत्म करते हुए खुले बाजार में कपास खरीदी-बिक्री शुरू करने के बाद से शहर का कपास उद्योग धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। पिछले 17 वर्षों में हालात यह हो गए कि सेंधवा से 100 से अधिक कपास कारखाने अन्य राज्यों में पलायन कर गए हैं। शहर में अब महज 10 के करीब कपास कारखाने मरणासन्न स्थिति में संचालित हो रहे हैं। कपास उद्योग खत्म होने के साथ ही शहर की मंडी में कपास की आवक भी खासी प्रभावित हुई है। पिछले पांच वर्षों में 30 फीसदी से अधिक आवक प्रभावित हुई है।

वर्ष 2015-16 में मंडी में करीब 10 लाख क्विंटल कपास की आवक हुई थी। वहीं वर्ष 2019-20 में करीब सात लाख क्विंटल कपास की आवक हुई। 2020-21 में 06 नवंबर तक महज 25 हजार क्विंटल कपास की आवक हो पाई है। मंडी उप निरीक्षक गुलाब शर्मा ने बताया कि कपास कारखाने महाराष्ट्र जाने के कारण शहर की मंडी में कपास की आवक घटी है। वहीं मॉडल एक्ट के कारण इस साल तो आवक और कम होगी।

एक नजर कपास आवक व आय पर

वर्ष – आवक – आय

2015-16 – 994505 – 48819849

2016-17 – 796538 – 41767177

2017-18 – 837522 – 40449704

2018-19 – 911263 – 53472492

2019-20 – 690124 – 50314365

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